इलाजे दर्द तुमसे मसीहा हो नहीं सकता
तुम अच्छा कर नहीं सकते मैं अच्छा हो नहीं सकता
मुज़्तर ख़ैराबादी
Urdu, Hindi, Sanskrit, English, Greek and Latin - all the poetry that has touched me.
इलाजे दर्द तुमसे मसीहा हो नहीं सकता
तुम अच्छा कर नहीं सकते मैं अच्छा हो नहीं सकता
मुज़्तर ख़ैराबादी
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देखा जो हुस्ने यार तबीयत मचल गई
आंखों का था क़सूर छुरी दिल पे चल गई
जलील मानकपुरी
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कुछ इख़्तियार किसी का नहीं तबीयत पर
ये जिस पे आती है बे इख़्तियार आती है
जलील मानकपुरी
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हम तुम मिले न थे तो जुदाई का था मलाल
अब ये मलाल है कि तमन्ना निकल गई
जलील मानकपुरी
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जब मैं चलूँ तो साया भी अपना न साथ दे
जब तुम चलो, ज़मीन चले, आसमां चले
जलील मानकपुरी
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जाते हो ख़ुदा हाफ़िज़, हाँ इतनी गुज़ारिश है
जब याद हम आ जायें मिलने की दुआ करना
जलील मानकपुरी
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