© V. Ravi Kumar. All rights reserved.

Page copy protected against web site content infringement by Copyscape

Saturday, November 28, 2009

तुम अच्छा कर नहीं सकते मैं अच्छा हो नहीं सकता

इलाजे दर्द तुमसे मसीहा हो नहीं सकता

तुम अच्छा कर नहीं सकते मैं अच्छा हो नहीं सकता

मुज़्तर ख़ैराबादी

Thursday, November 26, 2009

आंखों का था क़सूर छुरी दिल पे चल गई

देखा जो हुस्ने यार तबीयत मचल गई

आंखों का था क़सूर छुरी दिल पे चल गई

जलील मानकपुरी

ज़मीर कांप तो जाता है आप जो भी कहें

ज़मीर कांप तो जाता है आप जो भी कहें
वो हो गुनाह से पहले के हो गुनाह के बाद

कृष्ण बिहारी नूर

Tuesday, November 24, 2009

कुछ इख़्तियार किसी का नहीं तबीयत पर

कुछ इख़्तियार किसी का नहीं तबीयत पर

ये जिस पे आती है बे इख़्तियार आती है

जलील मानकपुरी

Sunday, November 22, 2009

अब ये मलाल है कि तमन्ना निकल गई

हम तुम मिले न थे तो जुदाई का था मलाल

अब ये मलाल है कि तमन्ना निकल गई

जलील मानकपुरी

Friday, November 20, 2009

न इशारा न किनाया न तबस्सुम न कलाम

न इशारा न किनाया न तबस्सुम न कलाम
पास बैठे हैं मगर दूर नज़र आते हैं

जलील मानकपुरी

Wednesday, November 18, 2009

बात साक़ी की न टाली जाएगी

बात साक़ी की न टाली जाएगी

करके तौबा तोड़ ड़ाली जाएगी

जलील मानकपुरी

Monday, November 16, 2009

जब तुम चलो, ज़मीन चले, आसमां चले

जब मैं चलूँ तो साया भी अपना न साथ दे

जब तुम चलो, ज़मीन चले, आसमां चले

जलील मानकपुरी

Saturday, November 14, 2009

जब याद हम आ जायें मिलने की दुआ करना

जाते हो ख़ुदा हाफ़िज़, हाँ इतनी गुज़ारिश है

जब याद हम आ जायें मिलने की दुआ करना

जलील मानकपुरी

Thursday, November 12, 2009

आलम में तुझसे लाख सही, तो मगर कहाँ

हम जिस पे मर रहे हैं वो है बात ही कुछ और
आलम में तुझसे लाख सही, तू मगर कहाँ

मौलाना अल्ताफ़ हुसैन 'हाली'