गुज़र गया है ज़माना गले लगाये हुये
मज़े विसाल के मुद्दत हुयी उठायी हुये
किसी ने ये भी ना सोचा हमारे दफ़्न के वक़्त
के इन पे ख़ाक़ ना डालो ये हैं नहाये हुये
किसी रईस की महफ़िल का ज़िक़्र क्या है अमीर
ख़ुदा के घर भी ना जायेंगे बिन बुलाये हुये
अमीर मीनाई
Urdu, Tamil, Kannada, Hindi, Sanskrit, English, Greek and Latin - all the poetry that has touched me.
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Friday, September 26, 2008
Wednesday, September 17, 2008
ख़ुदा के घर भी ना जायेंगे बिन बुलाये हुये
किसी रईस की महफ़िल का ज़िक़्र क्या है अमीर
ख़ुदा के घर भी ना जायेंगे बिन बुलाये हुये
अमीर मीनाई
ख़ुदा के घर भी ना जायेंगे बिन बुलाये हुये
अमीर मीनाई
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