हर चेहरे में तेरा चेहरा ढूंढ के तुझ को खो बैठे
घर का रस्ता भूल गये हम घर आने की जल्दी में
बशीर बद्र
Urdu, Tamil, Kannada, Hindi, Sanskrit, English, Greek and Latin - all the poetry that has touched me.
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Friday, October 17, 2008
Friday, September 26, 2008
ख़ुदा के घर भी ना जायेंगे बिन बुलाये हुये
गुज़र गया है ज़माना गले लगाये हुये
मज़े विसाल के मुद्दत हुयी उठायी हुये
किसी ने ये भी ना सोचा हमारे दफ़्न के वक़्त
के इन पे ख़ाक़ ना डालो ये हैं नहाये हुये
किसी रईस की महफ़िल का ज़िक़्र क्या है अमीर
ख़ुदा के घर भी ना जायेंगे बिन बुलाये हुये
अमीर मीनाई
मज़े विसाल के मुद्दत हुयी उठायी हुये
किसी ने ये भी ना सोचा हमारे दफ़्न के वक़्त
के इन पे ख़ाक़ ना डालो ये हैं नहाये हुये
किसी रईस की महफ़िल का ज़िक़्र क्या है अमीर
ख़ुदा के घर भी ना जायेंगे बिन बुलाये हुये
अमीर मीनाई
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