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Friday, October 17, 2008

घर का रस्ता भूल गये हम घर आने की जल्दी में

हर चेहरे में तेरा चेहरा ढूंढ के तुझ को खो बैठे
घर का रस्ता भूल गये हम घर आने की जल्दी में

बशीर बद्र

Friday, September 26, 2008

ख़ुदा के घर भी ना जायेंगे बिन बुलाये हुये

गुज़र गया है ज़माना गले लगाये हुये
मज़े विसाल के मुद्दत हुयी उठायी हुये
किसी ने ये भी ना सोचा हमारे दफ़्न के वक़्त
के इन पे ख़ाक़ ना डालो ये हैं नहाये हुये
किसी रईस की महफ़िल का ज़िक़्र क्या है अमीर
ख़ुदा के घर भी ना जायेंगे बिन बुलाये हुये

अमीर मीनाई