© V. Ravi Kumar. All rights reserved.

Page copy protected against web site content infringement by Copyscape
Showing posts with label भुलाने. Show all posts
Showing posts with label भुलाने. Show all posts

Friday, September 26, 2008

कुछ दर्द कलेजे से लगाने के लिये हैं

अशआर मेरे यूं तो ज़माने के लिये हैं
कुछ शेर फक़त तुझ को सुनाने के लिये हैं

अब ये भी नही ठीक के हर दर्द मिटा दें
कुछ दर्द कलेजे से लगाने के लिये हैं

ये इल्म का सौदा ये रिसाले ये किताबें
इक शख़्स की यादों को भुलाने के लिये हैं

जां निसार अख़्तर