दिल भी इक ज़िद पे अडा है किसी बच्चे की तरह
या तो सब कुछ ही इसे चाहिये या कुछ भी नहीं
राजेश रेड्डी
Urdu, Tamil, Kannada, Hindi, Sanskrit, English, Greek and Latin - all the poetry that has touched me.
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Wednesday, September 17, 2008
दिल मिले या ना मिले हाथ मिलाते रहिये
बात कम कीजे ज़हानत को छुपाते रहिये
ये नया शहर है कुछ दोस्त बनाते रहिये
दुश्मनी लाख सही ख़त्म ना कीजे रिश्ता
दिल मिले या ना मिले हाथ मिलाते रहिये
निदा फ़ाज़ली
ये नया शहर है कुछ दोस्त बनाते रहिये
दुश्मनी लाख सही ख़त्म ना कीजे रिश्ता
दिल मिले या ना मिले हाथ मिलाते रहिये
निदा फ़ाज़ली
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