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Sunday, October 18, 2009

छुटती नहीं है मुँह से ये काफ़िर लगी हुई

अय ज़ौक़, देख दुख़्तरे-रिज़ को न दिल लगा
छुटती नहीं है मुँह से ये काफ़िर लगी हुई

ज़ौक़

Friday, October 16, 2009

ख़ाक़ में जब मिल गये दोनों बराबर हो गये

कितने मुफ़लिस हो गये कितने तवंगर हो गये
ख़ाक़ में जब मिल गये दोनों बराबर हो गये

ज़ौक़

Wednesday, October 14, 2009

अब मुनासिब है यही कुछ मैं बढूं कुछ तुम बढो

बाद मुद्दत के गले मिलते हुए रुकता है दिल
अब मुनासिब है यही कुछ मैं बढूं कुछ तुम बढो

ज़ौक़

Saturday, October 10, 2009

मैं वो बला हूं शीशे से पत्थर को तोड़ दूं

नाज़ुक ख़यालियाँ मिरी तोड़े उदू का दिल

मैं वो बला हूं शीशे से पत्थर को तोड़ दूं

ज़ौक़

Thursday, October 8, 2009

ज़बाने ख़ल्क़ को नक़्क़ारा ए ख़ुदा समझो

बजा कहे जिसे आलम उसे बजा समझो
ज़बाने ख़ल्क़ को नक़्क़ारा ए ख़ुदा समझो

ज़ौक़

Tuesday, October 6, 2009

आराम से वो हैं जो तकल्लुफ़ नहीं करते

ऎ ज़ौक़ तकल्लुफ़ में है तकलीफ़ सरासर
आराम से वो हैं जो तकल्लुफ़ नहीं करते

ज़ौक़