अय ज़ौक़, देख दुख़्तरे-रिज़ को न दिल लगा
छुटती नहीं है मुँह से ये काफ़िर लगी हुई
ज़ौक़
Urdu, Tamil, Kannada, Hindi, Sanskrit, English, Greek and Latin - all the poetry that has touched me.
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Sunday, October 18, 2009
Friday, October 16, 2009
ख़ाक़ में जब मिल गये दोनों बराबर हो गये
कितने मुफ़लिस हो गये कितने तवंगर हो गये
ख़ाक़ में जब मिल गये दोनों बराबर हो गये
ज़ौक़
ख़ाक़ में जब मिल गये दोनों बराबर हो गये
ज़ौक़
Wednesday, October 14, 2009
अब मुनासिब है यही कुछ मैं बढूं कुछ तुम बढो
बाद मुद्दत के गले मिलते हुए रुकता है दिल
अब मुनासिब है यही कुछ मैं बढूं कुछ तुम बढो
ज़ौक़
अब मुनासिब है यही कुछ मैं बढूं कुछ तुम बढो
ज़ौक़
Saturday, October 10, 2009
मैं वो बला हूं शीशे से पत्थर को तोड़ दूं
नाज़ुक ख़यालियाँ मिरी तोड़े उदू का दिल
मैं वो बला हूं शीशे से पत्थर को तोड़ दूं
ज़ौक़
Thursday, October 8, 2009
Tuesday, October 6, 2009
आराम से वो हैं जो तकल्लुफ़ नहीं करते
ऎ ज़ौक़ तकल्लुफ़ में है तकलीफ़ सरासर
आराम से वो हैं जो तकल्लुफ़ नहीं करते
ज़ौक़
आराम से वो हैं जो तकल्लुफ़ नहीं करते
ज़ौक़
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