मैं छिपाना जानता तो जग मुझे साधू समझता
बन गया है शत्रु मेरा छल रहित व्यवहार मेरा
डॉ हरिवंश राय बच्चन
Urdu, Tamil, Kannada, Hindi, Sanskrit, English, Greek and Latin - all the poetry that has touched me.
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Saturday, December 4, 2010
Tuesday, January 26, 2010
कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती
लहरों से डर कर नौका पार नहीं होती,
कोशिश करने वालों की हार नहीं होती।
...
असफलता एक चुनौती है, स्वीकार करो,
क्या कमी रह गई, देखो और सुधार करो।
जब तक न सफल हो, नींद चैन को त्यागो तुम,
संघर्ष का मैदान छोड़ मत भागो तुम।
कुछ किये बिना ही जय जय कार नहीं होती,
कोशिश करने वालों की हार नहीं होती।
कोशिश करने वालों की हार नहीं होती।
...
असफलता एक चुनौती है, स्वीकार करो,
क्या कमी रह गई, देखो और सुधार करो।
जब तक न सफल हो, नींद चैन को त्यागो तुम,
संघर्ष का मैदान छोड़ मत भागो तुम।
कुछ किये बिना ही जय जय कार नहीं होती,
कोशिश करने वालों की हार नहीं होती।
Thursday, October 2, 2008
इस पार प्रिये मधु है तुम हो, उस पार ना जाने क्या होगा
इस पार, प्रिये मधु है तुम हो, उस पार न जाने क्या होगा!
यह चाँद उदित होकर नभ में कुछ ताप मिटाता जीवन का,
लहरा लहरा यह शाखाएँ कुछ शोक भुला देती मन का,
कल मुर्झाने वाली कलियाँ हँसकर कहती हैं मगन रहो,
बुलबुल तरु की फुनगी पर से संदेश सुनाती यौवन का,
तुम देकर मदिरा के प्याले मेरा मन बहला देती हो,
उस पार मुझे बहलाने का उपचार न जाने क्या होगा!
इस पार, प्रिये मधु है तुम हो, उस पार न जाने क्या होगा!
Wednesday, September 17, 2008
मैने मदिरा को पीकर के भी देख लिया है, मैने मदिरा को तज कर के भी देख लिया है
मैने मदिरा को पीकर के भी देख लिया है,
मैने मदिरा को तज कर के भी देख लिया है
मैं वहीं हूं, वही ग़म हैं, वही दुर्बलतायें हैं
हरिवंशराय बच्चन
मैने मदिरा को तज कर के भी देख लिया है
मैं वहीं हूं, वही ग़म हैं, वही दुर्बलतायें हैं
हरिवंशराय बच्चन
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