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Wednesday, February 10, 2010

कि दाना ख़ाक़ में मिल कर गुलो गुलज़ार होता है

मिटा दे अपनी हस्ती को गर कोई मरतबा चाहिये
कि दाना ख़ाक़ में मिल कर गुलो गुलज़ार होता है

मस्त कलकत्तवी

Saturday, February 6, 2010

वही होता है जो मंज़ूरे ख़ुदा होता है

मुद्दई लाख बुरा चाहे तो क्या होता है
वही होता है जो मंज़ूरे ख़ुदा होता है

मस्त कलकत्तवी

Thursday, February 4, 2010

हक़ीक़त छुप नहीं सकती बनावट के उसूलों से

हक़ीक़त छुप नहीं सकती बनावट के उसूलों से
कि ख़ुश्बू आ नहीं सकती कभी काग़ज़ के फूलों से
मस्त कलकत्तवी

Tuesday, February 2, 2010

इज़्ज़त उसे मिली जो वतन से निकल गया

वो फूल सर चढ़ा जो चमन से निकल गया

इज़्ज़त उसे मिली जो वतन से निकल गया

मस्त कलकत्तवी

Thursday, January 28, 2010

रंग लाती है हिना पत्थर पर घिस जाने के बाद

सुर्ख़ रू होता है इन्सां ठोकरें खाने के बाद
रंग लाती है हिना पत्थर पर घिस जाने के बाद

मस्त कलकत्तवी