मिटा दे अपनी हस्ती को गर कोई मरतबा चाहिये
कि दाना ख़ाक़ में मिल कर गुलो गुलज़ार होता है
मस्त कलकत्तवी
Urdu, Tamil, Kannada, Hindi, Sanskrit, English, Greek and Latin - all the poetry that has touched me.
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Wednesday, February 10, 2010
Saturday, February 6, 2010
वही होता है जो मंज़ूरे ख़ुदा होता है
मुद्दई लाख बुरा चाहे तो क्या होता है
वही होता है जो मंज़ूरे ख़ुदा होता है
मस्त कलकत्तवी
Thursday, February 4, 2010
हक़ीक़त छुप नहीं सकती बनावट के उसूलों से
हक़ीक़त छुप नहीं सकती बनावट के उसूलों से
कि ख़ुश्बू आ नहीं सकती कभी काग़ज़ के फूलों से
मस्त कलकत्तवी
कि ख़ुश्बू आ नहीं सकती कभी काग़ज़ के फूलों से
मस्त कलकत्तवी
Tuesday, February 2, 2010
इज़्ज़त उसे मिली जो वतन से निकल गया
वो फूल सर चढ़ा जो चमन से निकल गया
इज़्ज़त उसे मिली जो वतन से निकल गया
मस्त कलकत्तवी
Thursday, January 28, 2010
रंग लाती है हिना पत्थर पर घिस जाने के बाद
सुर्ख़ रू होता है इन्सां ठोकरें खाने के बाद
रंग लाती है हिना पत्थर पर घिस जाने के बाद
मस्त कलकत्तवी
रंग लाती है हिना पत्थर पर घिस जाने के बाद
मस्त कलकत्तवी
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