रूदादे ग़मे उल्फ़त उन से हम क्या कहते, क्योंकर कहते
इक हर्फ़ न निकला होठों से और आँख में आँसू आ भी गये
इसरार उल हक़ मजाज़
Urdu, Tamil, Kannada, Hindi, Sanskrit, English, Greek and Latin - all the poetry that has touched me.
रूदादे ग़मे उल्फ़त उन से हम क्या कहते, क्योंकर कहते
इक हर्फ़ न निकला होठों से और आँख में आँसू आ भी गये
इसरार उल हक़ मजाज़
कुछ तबीयत ही मिली थी ऐसी
चैन से जीने की सूरत न हुई
जिसे चाहा उसे अपना न सके
जो मिला उससे मोहब्बत न हुई
मजाज़