तेरी मसरूफ़ियतें जानते थे
अपने आने की ख़बर क्या करते
वो मुसाफ़िर ही ख़ुली धूप का था
साये फैला के शजर क्या करते
परवीन शाकिर
Urdu, Tamil, Kannada, Hindi, Sanskrit, English, Greek and Latin - all the poetry that has touched me.
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Tuesday, April 13, 2010
Friday, July 10, 2009
चिडियों को बडा प्यार था इस बूढे शजर से
कल रात जो ईंधन के लिये कट के गिरा है
चिडियों को बडा प्यार था इस बूढे शजर से
परवीन शाकिर
चिडियों को बडा प्यार था इस बूढे शजर से
परवीन शाकिर
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