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Tuesday, April 13, 2010

तेरी मसरूफ़ियतें जानते थे

तेरी मसरूफ़ियतें जानते थे
अपने आने की ख़बर क्या करते

वो मुसाफ़िर ही ख़ुली धूप का था
साये फैला के शजर क्या करते

परवीन शाकिर

Friday, July 10, 2009

चिडियों को बडा प्यार था इस बूढे शजर से

कल रात जो ईंधन के लिये कट के गिरा है
चिडियों को बडा प्यार था इस बूढे शजर से
परवीन शाकिर