यहां हर शख़्स हर पल हादिसा होने से डरता है
खिलौना है जो मिट्टी का फ़ना होने से डरता है
मेरे दिल के किसी कोने में एक मासूम सा बच्चा
बड़ों की देख कर दुनिया बड़ा होने से डरता है
अजब ये ज़िन्दगी की क़ैद है दुनिया का हर इंसान
रिहाई मांगता है और रिहा होने से डरता है
राजेश रेड़्डी
Urdu, Tamil, Kannada, Hindi, Sanskrit, English, Greek and Latin - all the poetry that has touched me.
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Friday, September 19, 2008
Wednesday, September 17, 2008
दुनिया में हूं दुनिया का तलबग़ार नहीं हूं
दुनिया में हूं दुनिया का तलबग़ार नहीं हूं
बाज़ार से गुज़रा हूं ख़रीदार नहीं हूं
अकबर इलाहाबादी
Duniyaa me.n huu.N duniyaa kaa talab_gaar nahii.n huu.N
baazaar se guzaraa huu.N Khariidaar nahii.n huu.N
Akbar Allahabadi
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