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Sunday, November 8, 2009

कुछ ज़हर न थी शराबे अंगूर

कुछ ज़हर न थी शराबे अंगूर

क्या चीज़ हराम हो गई है

दाग़ देहलवी

Wednesday, November 4, 2009

बहुत देर की मेहरबां आते आते

न जाना कि दुनिया से जाता है कोई
बहुत देर की मेहरबां आते आते

na jaanaa ki duniyaa se jaataa hai koii
bahut der kii meherbaa.n aate aate

You did not realise that I was on my deathbed
My beloved you took a long time to come and meet me

दाग़ देहलवी

Wednesday, October 28, 2009

उन्हें ये ज़िद कि इसी आन लेके जायेंगे

हमें ये फ़िक़्र कि दिल सोच कर समझकर दें
उन्हें ये ज़िद कि इसी आन लेके जायेंगे

दाग़ देहलवी

Monday, October 26, 2009

हाय! कमबख़्त तूने पी ही नहीं

लुत्फ़े मय तुझ से क्या कहूं ज़ाहिद
हाय! कमबख़्त तूने पी ही नहीं

उड़ गई यूं वफ़ा ज़माने से
कभी गोया किसी में थी ही नहीं

'दाग़' क्यों तुम को बेवफ़ा कहता
वो शिकायत का आदमी ही नहीं

Saturday, October 24, 2009

और खुल जायेंगे दो चार मुलाक़ातों में

राह पर उन को लगा लाये तो हैं बातों में
और खुल जायेंगे दो चार मुलाक़ातों में

दाग़ देहलवी

Thursday, October 22, 2009

तख़ल्लुस दाग़ है और आशिक़ों के घर में रहता हूं

ख़ुदा रक्खे मुहब्बत ने किये आबाद घर दोनों
वो मेरे दिल में रहते हैं मैं उनके दिल में रहता हूं

कोई नामो निशां पूछे तो ऎ क़ासिद बता देना
तख़ल्लुस दाग़ है और आशिक़ों के घर में रहता हूं

दाग़ देहलवी