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Saturday, October 18, 2008

जो दर बन्द होंगे दरीचे खुलेंगे

मुंतज़र फूल में ख़ुशबू की तरह हूं कब से
कोई झोंके की तरह आये उडा कर ले जाये

तुम मेरी ज़िन्दगी हो ये सच है
ज़िन्दगी का मगर भरोसा क्या

वसीला है इंसान राज़िक ख़ुदा है
जो दर बन्द होंगे दरीचे खुलेंगे

वसीला = ज़रिया, माध्यम; राज़िक = रोटी देने वाला; दरीचे = खिड़कियाँ

बशीर बद्र