© V. Ravi Kumar. All rights reserved.

Page copy protected against web site content infringement by Copyscape
Showing posts with label जिगर मुरादाबादी. Show all posts
Showing posts with label जिगर मुरादाबादी. Show all posts

Wednesday, July 10, 2013

वो अब चल चुके हैं वो अब आ रहे हैं

यह कह कह के हम दिल को बहला रहे हैं 
वो अब चल चुके हैं वो अब आ रहे हैं 

yeh keh keh ke hum dil ko behlaa rahe hain
vo ab chal chuke hain vo ab aa rahe hain

I repeatedly console myself with the thought
That she has just left and she is just about to reach

जिगर मुरादाबादी 

Continuing with Jigar, the met department predicted a two-week early monsoon in Delhi this year. But now it is almost two weeks late. And I cannot but find succour in this couplet of Jigar. 

Monday, July 1, 2013

मैं तुमसे छूट कर किसी क़ाबिल नहीं रहा


इन दिनों मैं जिगर मोरादाबादी साहब को पढ़ रहा हूँ. हालांकि मैं उनका मुरीद नहीं हूँ, पर लगता है कि कुछ तो बात ज़रूर है. हाल ही में जदयू और भाजपा अलग हुए थे. आने वाले एक वर्ष में पता चलेगा कि जिगर का ये शेर किस पर ज़्यादा लागू होता है

तुम मुझ से छूट कर रहे सब की निगाह में
मैं तुमसे छूट कर किसी क़ाबिल नहीं रहा

tum mujhse chhooT kar rahe sab kee nigaah me.n
mai.n tumse chhooT kar kisee qaabil nahee.n rahaa

You seem to have prospered after breaking away from me
I on the other hand, have been devastated after this break up

Jigar Moradabadi
जिगर मोरादाबादी

Wednesday, December 30, 2009

अल्लाह रे पाबन्दी-ए-आदाबे मुहब्बत

अल्लाह रे पाबन्दी-ए-आदाबे मुहब्बत
गुलशन में रहे और गुलिस्ताँ नहीं देखा

जिगर मुरादाबादी

Friday, December 4, 2009

तुम मुझ से छूट कर रहे सब की निगाह में

तुम मुझ से छूट कर रहे सब की निगाह में

मैं तुमसे छूट कर किसी क़ाबिल नहीं रहा

जिगर मुरादाबादी

Wednesday, December 2, 2009

ये इश्क़ नहीं आसाँ इतना ही समझ लीजे

ये इश्क़ नहीं आसाँ इतना ही समझ लीजे

इक आग का दरया है और डूब के जाना है

आंसू तो बहुत हैं आंखों में 'जिगर' लेकिन

बिंध जाये तो मोती है, रह जाये तो दाना है

जिगर मुरादाबादी

Monday, November 30, 2009

दिल कुछ इस सूरत से तड़पा उन को प्यार आ ही गया

काम आख़िर जज़्बये बे इख़्तियार आ ही गया

दिल कुछ इस सूरत से तड़पा उन को प्यार आ ही गया

जिगर मुरादाबादी

Sunday, September 20, 2009

अपना पैग़ाम मुहब्बत है जहाँ तक पहुँचें

उनका जो फ़र्ज़ है वो अहले-सियासत जाने
अपना पैग़ाम मुहब्बत है जहाँ तक पहुँचें

जिगर