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Friday, February 12, 2010

मुझको भी तरकीब सिखा दे यार जुलाहे

मुझको भी तरकीब सिखा दे यार जुलाहे
अकसर तुझको देखा है कि ताना बुनते
जब कोई तागा टूट गया या ख़त्म हुआ
फिर से बांध के और सिरा कोई जोड़ के उसमें
आगे बुनने लगते हो
तेरे इस ताने में लेकिन
इक भी गांठ गिरह बुन्तर की
देख नहीं सकता कोई

मैनें तो इक बार बुना था एक ही रिश्ता
लेकिन उसकी सारी गिरहें
साफ़ नजर आती हैं मेरे यार जुलाहे

Thursday, August 20, 2009

आदतन हमने एतबार किया

आदतन तुमने कर दिये वादे

आदतन हमने एतबार किया

गुलज़ार