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Saturday, December 26, 2009

सारी दुनिया हमें पहचानती है

आपसे झुक के जो मिलता होगा

उसका क़द आपसे ऊंचा होगा

जिसकी फ़नकार का शहकार हो तुम

उसने बरसों तुम्हें सोचा होगा

सारी दुनिया हमें पहचानती है

कोई हमसा भी न तन्हा होगा

अहमद नदीम क़ासमी

Sunday, August 30, 2009

बुझ तो जाऊंगा मगर सुबहा तो कर जाऊँगा

ज़िन्दगी शमा की मानिन्द जला हूं मैं नदीम

बुझ तो जाऊंगा मगर सुबहा तो कर जाऊँगा

अहमद नदीम क़ासमी

Wednesday, September 17, 2008

एक चेहरे के पीछे हज़ार चेहरे थे

नदीम जो भी मुलाक़ात थी अधूरी थी
कि एक चेहरे के पीछे हज़ार चेहरे थे

अहमद नदीम क़ासमी